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अफ्रीका में जीवन की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने का एक रास्ता रिश्वत

जट्टा वुल्फ

बर्लिन (आईडीएन) - एक आदमी ने स्कूल जा रही एक एक नौ वर्षीया लड़की के साथ बलात्कार किया और उसे एचआईवी से संक्रमित कर दिया। जिम्बाब्वे पुलिस ने पहले तो हमलावर को गिरफ्तार कर लिया लेकिन फिर उसे गुपचुप रिहा कर दिया। कारण: उसने रिश्वत दी थी।

यह मामला किसी भी तरह से एक अपवाद नहीं है। पुलिस और निजी क्षेत्र को नियमित रूप से अत्यधिक भ्रष्ट का दर्जा दिया गया है, यह कहना है लोग और भ्रष्टाचार: अफ्रीका सर्वेक्षण 2015 शीर्षक एक रिपोर्ट में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल का, जो आगे कहती है: "हम इस तरह की कहानियां हर दिन सुनते हैं...। कई देशों में आप किसी भी अपराध की अनदेखी करने के लिए पुलिस अधिकारियों को पैसे दे सकते हैं, चाहे अपराध कितना ही भयानक और विनाशकारी हो - यह केवल कीमत का एक मामला है"।

रिपोर्ट कहती है कि वास्तव में रिश्वतखोरी पांच अफ्रीकियों में से एक से अधिक को प्रभावित करती है। "हैरानी की बात है, हमारा अनुमान है कि लगभग 750 लाख लोगों ने पिछले वर्ष रिश्वत दी थी - इनमें से कुछ पुलिस या अदालतों द्वारा सजा से बचने के लिए दिए गए थे लेकिन कई लोगों को उन बुनियादी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए रिश्वत देने को मजबूर किया गया जिनकी उनको बहुत सख्त जरूरत थी।"

वैश्विक भ्रष्टाचार बैरोमीटर के इस नवीनतम अफ्रीकी संस्करण के लिए, ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने एफ्रोबैरोमीटर के साथ भागीदारी की जिसने मार्च 2014 और सितंबर 2015 के बीच उप-सहाराई अफ्रीका के 28 देशों में 43,143 उत्तरदाताओं से बात की और उनसे उनके देश में भ्रष्टाचार के अपने अनुभवों और धारणाओं के बारे में सवाल पूछे।

रिपोर्ट कहती है "अधिकांश अफ्रीकियों का मानना है कि भ्रष्टाचार में वृद्धि हो रही है और उनको लगता है कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार से लड़ने के अपने प्रयासों में असफल साबित हुई है; और बहुत से लोग भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई करने के संबंध में अशक्त भी महसूस करते हैं। सियरा लियोन, नाइजीरिया, लाइबेरिया और घाना के नागरिक अपने देश में भ्रष्टाचार के पैमाने को लेकर सबसे नकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।”

हालांकि परिणाम इस बात पर भी प्रकाश डालते हैं कि इस क्षेत्र में ऐसे देशों की एक छोटी सी संख्या है जिन्हें भ्रष्टाचार की इस बीमारी को दूर करने में काफी अच्छा करते हुए देखा जाता है - जहां केवल कुछ ही लोगों को रिश्वत देनी पड़ती है या जहां नागरिक यह महसूस करते हैं कि वे भ्रष्टाचार को रोकने में योगदान कर सकते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, बोत्सवाना, लेसोथो, सेनेगल और बुर्किना फासो के नागरिक इस क्षेत्र के अन्य देशों के नागरिकों की तुलना में काफी सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं।

रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष यह है कि भ्रष्टाचार-विरोध के संबंध में कुछ मजबूत प्रदर्शन करने वाले देशों और पूरे महाद्वीप में भ्रष्टाचार-विरोध पर कई कमजोर प्रदर्शन करने वाले देशों के बीच एक स्पष्ट असमानता है।

इस निष्कर्ष में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की धारणा दोनों प्रकार की है - एक आशावादी संदेश कि भ्रष्टाचार को दूर करना वास्तव में संभव है और एक निराशाजनक संदेश कि अधिकांश अफ्रीकी देश भ्रष्टाचार के ज्वार रोकने में प्रगति करने में विफल रहे हैं।

यह रिपोर्ट अपने मुख्य निष्कर्षों को इस प्रकार सारांशित करती है:

1. अधिकांश अफ्रीकियों (58%) का कहना है कि पिछले वर्ष में भ्रष्टाचार बढ़ गया है: दक्षिण अफ्रीका में पांच में से चार नागरिकों (83%) का कहना है कि उन्होंने हाल ही में भ्रष्टाचार में वृद्धि देखी है।

2. ऐसी कोई भी सरकार नहीं है जिसे अपने नागरिकों के स्पष्ट बहुमत से उसके भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों पर सकारात्मक मूल्यांकन किया गया हो।इसके विपरीत, 28 में से 18 सरकारों को एक बड़े बहुमत से भ्रष्टाचार को रोकने में पूरी तरह से नाकाम रहने के रूप में देखा जाता है।

3. सर्वेक्षण में पूछा गया कि समाज के 10 प्रमुख संस्थानों और समूहों कितना भ्रष्टाचार था। पूरे क्षेत्र में पुलिस और व्यावसायिक अधिकारियों में भ्रष्टाचार का उच्चतम स्तर देखा गया है।

4. उप-सहाराई अफ्रीका में पिछले 12 महीनों में किसी सार्वजनिक सेवा के संपर्क में आने वाले लोगों में बाईस प्रतिशत ने रिश्वत दिया है, लेकिन लाइबेरिया में हालात सबसे खराब हैं जहां दस में से सात लोगों ने रिश्वत दी है।

5. छः प्रमुख सार्वजनिक सेवाओं में, पुलिस और अदालतों के संपर्क में आने वाले लोगों द्वारा रिश्वत दिए जाने की सबसे अधिक संभावना है।

6. क्षेत्र के लोगों को इस आधार पर विभाजित किया गया है कि क्या आम लोग भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में कोई फर्क पैदा कर सकते हैं - आधे से कुछ अधिक लोगों का मानना है कि वे ऐसा कर सकते हैं (53 प्रतिशत) जबकि 38 प्रतिशत को लगता है कि वे ऐसा नहीं कर सकते हैं।

7. इसके बावजूद भ्रष्टाचार को दूर भगाना संभव है। कुछ ऐसे देश हैं जिनमें नागरिकों को अपने सार्वजनिक संस्थानों में भ्रष्टाचार का निम्न स्तर दिखाई देता है और वे अपने देश में भ्रष्टाचार को कम होता देखते हैं। बोत्सवाना, लेसोथो, सेनेगल और बुर्किना फासो के नागरिकों के विचार विशेष रूप से अनुकूल हैं।

चूंकि भ्रष्टाचार विकास और आर्थिक विकास के लिए एक प्रमुख अवरोध हो सकता है, और चूंकि यह सरकार में लोगों के विश्वास और सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही को कमजोर करता है, रिपोर्ट सरकार से ठोस उपायों का सहारा लेकर अपने देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करती है। [आईडीएन- इनडेप्थन्यूज़ - 01 दिसंबर 2015]