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एक तुर्की वैरागी जो पश्चिमी और मुस्लिम विश्व के बीच का पुल बना है

फेबियोला ओर्टिज़

पेनसिल्वेनिया (आईडीएन) - एक स्वतंत्र वैश्विक और परस्पर नागरिकता समाज के भीतर एक अहिंसक और शांतिपूर्ण संस्कृति को बढ़ावा देने का मार्ग बन सकती है। यह एक जमीनी स्तर के आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है जो शिक्षा को बढ़ाने, सार्वभौमिक मूल्यों, आपसी संवाद और लोकतंत्र को बढ़ावा की वकालत करता है।

एक तुर्की मुस्लिम विद्वान फेतुल्लाह ग्लेन "हिज़मत" (तुर्की में 'सेवा) नामक आंदोलन के पीछे की प्रेरणा है। एक उदारवादी मुस्लिम के रूप में देखे जाने वाले ग्लेन आपसी संवाद की जरूरत, शैक्षिक परियोजनाओं को स्वतंत्र रूप से और निष्पक्षता से जीवन जीने के लिए समाज के एक बंधन मुक्त उपकरण बनाने और इस विचार पर जोर देते हैं कि विज्ञान और धर्म साथ-साथ चल सकते हैं।

बीते पांच दशकों में यह आंदोलन तुर्की में विकसित हुआ और दुनिया भर में तुर्की के प्रवासियों के माध्यम से 100 से अधिक देशों में फैल गया है। अनुमान लगाया गया है कि तुर्की की आबादी का लगभग 10 से 15% भाग किसी न किसी तरह से इस आंदोलन से जुड़ा हुआ है जिसकी कोई केंद्रीकृत नौकरशाही नहीं है।

मार्टिन लूथर किंग और महात्मा गांधी से अक्सर तुलना किये जाने वाले बुजुर्ग मुस्लिम मौलवी ग्लेन संयुक्त राज्य अमेरिका के अंतर्देशीय पहाड़ों में एक स्वप्रेरित निर्वासन में अलग-थलग रहते हैं, लेकिन हाल ही में उनको निशाना बनाया गया है, उनके समर्थकों को उनके अपने देश में स्थानीय सरकार ने सताया और गिरफ्तार किया है।

जनता के बीच शायद ही कभी देखे जाने वाले और एक खराब एवं कमजोर स्वस्थ्य के ग्लेन, जिनकी अनुमानित आयु 77 वर्ष की है, मध्य पूर्व की राजनीतिक अशांति से दूर एक वैरागी के रूप में रहना पसंद करते हैं।

"हिज़मत आध्यात्मिक संदेश, समझदारी के तर्क, विज्ञान, लोकतंत्र, कला, समाज सेवा का एक मिश्रण है जो संपूर्ण मानवता के लिए खुला है। अगर मैं श्री ग्लेन को परिभाषित कर सकता हूं तो मैं कहूंगा कि वे एक धार्मिक व्यक्ति, एक उपदेशक और एक सामाजिक वकील हैं। उनका ध्यान हमेशा शिक्षा पर रहा है। उनका मानना है कि हम अपने समाज में जिन सामाजिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं उनकी जड़ें मस्तिष्क में समायी हुई हैं" - यह बात आल्प अस्लांदोगन ने आईडीएन को बतायी। वे साझा मूल्यों के लिए एनजीओ गठबंधन के अध्यक्ष हैं जो आम तौर पर मौलवी साहब की ओर से बोलते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस्लाम का यह उदारवादी दृष्टिकोण इस्लाम की कट्टरता को रोकने में सहायक एक प्रतिकारी उपाय है। आंदोलन की स्वैच्छिक प्रकृति इसके समर्थकों के साथ-साथ इसकी गैर-पदानुक्रमिक संरचना के द्वारा सृजित सिद्धांतों के सेट का हिस्सा है।

अस्लांदोगन ने आगे कहा "वे मानवता की सेवा करने के लिए स्कूलों, अस्पतालों, धर्मार्थ संस्थाओं और व्यावसायिक संगठनों का निर्माण करने के प्रति लोगों को प्रोत्साहित करते हैं। उनका दर्शन यह है कि हर इंसान के पास आध्यात्मिक विकास करने और किसी को भी बदलने की उम्मीद के बिना एक बेहतर नागरिक बनने के लिए समाज सेवा करने का एक मिशन है।"

ग्लेन ने हाल ही में सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि आतंकवाद एक कैंसर है जो इस्लाम का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। वे 2001 में न्यूयॉर्क में ट्विन टावर्स पर 9/11 के हमलों की निंदा करने के पहले मुस्लिम विद्वान थे। "होसीफेंदी" - जिसका तुर्की में अर्थ है 'सम्मानित शिक्षक' जैसा कि उन्हें आम तौर पर कहा जाता है - वे आतंकवादी कृत्यों का औचित्य साबित करने के लिए इस्लाम के राजनीतिक, धार्मिक और वैचारिक इस्तेमाल की आलोचना करते हैं।

खराब स्वास्थ्य से ग्रस्त और मधुमेह तथा हृदय रोग के उपचार करा रहे विद्वान ग्लेन इस्लाम के धर्मशास्त्र के अपने 25 छात्रों के साथ प्रार्थनाओं, अध्ययनों और शिक्षणों की एक नियमित दिनचर्या बनाए रखने की कोशिश में जुटे हैं।

"दुनिया भर के लोग उनसे मिलने और उनकी सलाह लेने के लिए आते हैं। वे एक बहुत ही विनम्र व्यक्ति हैं लेकिन थके हुए और शारीरिक रूप से बीमार दिखाई देते हैं। वे अभी भी मेरे लिए एक बड़ी प्रेरणा हैं," यह बात एहसान यिलमाज़ ने आईडीएन को बतायी। वे थिंक टैंक इस्तांबुल इंस्टिट्यूट के प्रेसिडेंट और ग्लेन के एक निजी मित्र हैं।

यिलमाज़ आम तौर पर पेंसिल्वेनिया के रिट्रीट सेंटर में वर्ष में चार बार अपने मित्र से मिलते हैं। उन्होंने खेद प्रकट किया "वे बहुत परेशान हैं क्योंकि आंदोलन से संबद्ध बहुत से लोग जो जेल में हैं और अब हिज़मत के लोगों को देश छोड़ने की सलाह दे रहे हैं। तुर्की में अब कानून का शासन नहीं रह गया है।" [आईडीएन- इनडेप्थन्यूज़ - 04 दिसंबर 2015]