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सतत विकास के लिए वैश्विक नागरिकता शिक्षा का उपयोग

लेखक ए.डी. मैकेंजी

पेरिस (आईडीएन) - सितंबर में सतत विकास के लक्ष्यों को अपनाने के बाद से, वैश्विक नागरिकता शिक्षा पर सतत विकास में और युवाओं के "हिंसक चरमपंथियों 'की श्रेणियों में शामिल होने से रोकने दोनों में इसके द्वारा निभायी जाने वाली भूमिका पर अधिक से अधिक ध्यान दिया जाने लगा है।

"कई देश तेजी से हिंसक उग्रवाद से अवगत होते जा रहे हैं और वे उनके बारे में चिंतित हैं, और (यूनेस्को) का दृष्टिकोण वैश्विक नागरिकता शिक्षा के माध्यम से सदस्य देशों को सहायता प्रदान करने का है क्योंकि यह मूल्यों पर जोर डालता है" - यह बात स्वास्थ्य एवं वैश्विक नागरिकता शिक्षा के लिए यूनेस्को के सेक्शन के प्रमुख, क्रिस्टोफर कैसल ने कही है।

उन्होंने एक साक्षात्कार में आईडीएन को बताया कि सभी के लिए सम्मान की शिक्षा प्राप्त करना और "एकता एवं सहयोग" जैसे मूल्यों के बारे में सोचने का अवसर पाना उन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है जो स्कूलों में हैं।

एसडीजी के साथ - जिसने सार्वभौमिक शिक्षा को एक प्रमुख उद्देश्य के रूप में बनाए रखा है - कई सरकारों ने इस बात पर जोर दिया है कि लक्ष्यों के कार्यान्वयन के लिए युवा लोगों की आवाज को ध्यान में रखा जाना चाहिए, और इस लक्ष्य को हासिल करने का एक तरीका वैश्विक नागरिकता शिक्षा को मजबूती प्रदान करने का है।

कैसल ने आईडीएन को बताया कि हिंसक चरमपंथ की चिंताएं विभिन्न देशों के "एजेंडा पर काफी मजबूती से आयी हैं" क्योंकि सरकारों ने शिक्षा के माध्यम से इस आंदोलन को रोकने के तरीकों की जांच की है।

कैसल ने आगे कहा "जीसीईडी के माध्यम से हम महत्वपूर्ण सोच कौशल में सुधार कर सकते हैं ताकि शिक्षार्थी (एक) दूसरे के लिए सम्मान के फायदों को देख सकें।" "हमें इस बात की खुशी थी कि एसडीजी के अंतिम संस्करण में... सतत विकास की शिक्षा और जीसीईडी के लिए शिक्षा के लक्ष्य को बरकरार रखा गया है।"

उन्होंने आगे कहा "लेकिन मुझे लगता है कि एसडीजी ने वास्तव में सदस्य देशों में दिलचस्पी बढ़ाने और आम सहमति बनाने का काम किया है कि शिक्षा की पहुंच, जो सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों के अंतर्गत एक प्रमुख चिंता का विषय रहा था, अब पर्याप्त नहीं रह गई है"।

"जो लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है - और जाहिर है कि हमें उन लगभग 570 लाख बच्चों की बहुत अधिक चिंता है जो अभी भी स्कूल में नहीं हैं और उनको होना चाहिए - लेकिन हम इस बात से भी अवगत हैं कि एक बार जब बच्चों को अपने शिक्षा के अधिकार का प्रयोग करने का एक अवसर मिल जाएगा, हमें उस शिक्षा के प्रकार के बारे में अधिक सोचना शुरू करने की जरूरत होगी जो वे स्कूल में रहने के दौरान हासिल कर सकते हैं।"

यूनेस्को के अनुसार, वैश्विक नागरिकता शिक्षा का उद्देश्य "सभी उम्र के शिक्षार्थियों को उन मूल्यों, ज्ञान और कौशल के साथ सुसज्जित करना है जो मानव अधिकारों, सामाजिक न्याय, विविधता, लैंगिक समानता और पर्यावरणीय स्थिरता पर आधारित हैं और इनके लिए मन में सम्मान रखते हैं और जो शिक्षार्थियों को जिम्मेदार वैश्विक नागरिक बनने के लिए सशक्त करते हैं।"

इसके अलावा जीईसीडी शिक्षार्थियों को "अपने अधिकारों और दायित्वों को समझने की योग्यता और अवसर प्रदान करता है ताकि सभी के लिए एक बेहतर विश्व और भविष्य को बढ़ावा देने का काम किया जा सके" यह सभी उम्र के लोगों: बच्चों, युवाओं और वयस्कों के लिए लक्षित है।

यूनेस्को का कहना है, हालांकि वैश्विक नागरिकता शिक्षा विभिन्न तरीकों से प्रदान की जा सकती है, ज्यादातर देशों में मुख्य तरीका औपचारिक शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही होगा। जिस प्रकार सरकारें या तो मौजूदा कार्यक्रमों के भाग के रूप में या एक अलग विषय के रूप में इस अवधारणा को एकीकृत कर सकती हैं।

"वैश्विक नागरिकता" के मूल्यों पर कुछ समय से विचार में किया जाता रहा है, लेकिन 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव के ग्लोबल एजुकेशन फर्स्ट इनिशिएटिव (जीईएफआई) की शुरुआत के साथ इसमें तेजी आयी जिसने 'वैश्विक नागरिकता को बढ़ावा देने' की पहचान शिक्षा की पहुंच और इसकी गुणवत्ता के साथ अपने कार्य के तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में एक के रूप में की है"।

कैसल ने कहा कि 2017 में कनाडा में आयोजन के लिए निर्धारित वैश्विक नागरिकता शिक्षा पर यूनेस्को के अगले फोरम में जीसीईडी और सतत विकास के लिए शिक्षा दोनों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

संगठन तृतीयक संस्थाओं के साथ भी काम कर रहा है जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका में यूसीएलए जहां इसने एक कार्यालय बनाया है। कैसल ने आगे कहा कि यूसीएलए समाज के विभिन्न क्षेत्रों को एक साथ लाते हुए, वैश्विक नागरिकता शिक्षा में एक ग्रीष्मकालीन स्कूल कार्यक्रम पेश करने की योजना पर काम कर रहा है।

यूनेस्को ने अंतर्राष्ट्रीय समझ के लिए शिक्षा के एशिया-प्रशांत केंद्र के सहयोग से जीसीईडी पर एक क्लीरिंगहाउस बनाया है और इसके अलावा आम जनता को एक स्वास्थ्य एवं एचआईवी क्लियरिंग हाउस की पहुंच भी उपलब्ध है जिसे पेरिस स्थित इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग के माध्यम से व्यवस्थित किया जाता है।

यह सूचना, नीतिगत दस्तावेजों, पाठ्यक्रम गतिविधियों, कार्य योजनाओं और सरकारी दस्तावेजों का एक व्यापक भंडार है।

यूनेस्को की महानिदेशक इरीना बोकोवा कहती हैं कि विश्व को "युवाओं की ऊर्जा का दोहन करने की जरूरत है" क्योंकि दुनिया के देश एमडीजी से एक सतत विकास के एजेंडे को अपनाने की दिशा में बढ़ रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा "2030 में जब तक हम एसडीजी की समय सीमा तक पहुंचेंगे, युवाओं की आबादी में 7 प्रतिशत की वृद्धि हो गई होगी।इसलिए यह बात महत्वपूर्ण है कि अगर हम इन लक्ष्यों को हासिल करने के अवसर का लाभ उठाना चाहते हैं तो हमें इनको अभी शामिल करना होगा।"

शिक्षण के "मानवतावादी" पहलुओं पर जोर देते हुए बोकोवा ने यह तक दिया कि शिक्षा सिर्फ जानकारी और ज्ञान का संप्रेषण नहीं है, बल्कि इसका संबंध उन मूल्यों, योग्यताओं और प्रवृत्तियों को जन्म देने से भी है जो एक अधिक "शांतिपूर्ण, न्यायोचित, समावेशी और टिकाऊ" विश्व के निर्माण में योगदान कर सके।

लेकिन यूनेस्को के विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ शिक्षा एक 'जादुई गोली' नहीं है। देशों को युवा बेरोजगारी को कम करने, असमानता को मिटाने और समावेश को बढ़ावा देने पर काम करने की जरूरत है।आईडीएन- इनडेप्थन्यूज़ – 28 अक्टूबर 2015]