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ग्लोबल नागरिकता शिक्षा शांतिपूर्ण समाज के निर्माण के लिए युवाओं के प्रयासों को मजबूती प्रदान करती है

लेखिका कान्या डी'अल्मीडा

संयुक्त राष्ट्र (आईडीएन) - 2015 के मध्य तक, 10 और 24 वर्ष की उम्र के बीच के युवाओं की संख्या 1.8 अरब पर पहुंच गई है जो दुनिया में युवाओं की अब तक की सबसे बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस जनसांख्यिकी का एक बड़ा हिस्सा वैश्विक दक्षिण में स्थित है जहां बच्चे और किशोर मिलकर दुनिया के 48 सबसे कम विकसित देशों (एलडीसी) की संयुक्त आबादी का एक बड़ा हिस्सा बनते हैं।

लेकिन चूंकि विभिन्न युवा नेताओं ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) द्वारा संचालित एक संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन में बताया कि युवाओं को आज कई प्रकार की कठिनाइयों सामना करना पड़ रहा है।

मतभिन्नता, भ्रष्टाचार और जलवायु परिवर्तन केवल कुछ गिनी-चुनी चुनौतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिनका सामना युवाओं को रोजमर्रा के आधार पर करना पड़ता है, यह बात 'युवा शांति निर्धारकों को मजबूत करने में वैश्विक नागरिकता शिक्षा (जीसीईडी) की भूमिका' विषय पर 10-11 सितंबर को आयोजित दो-दिवसीय सम्मलेन में प्रतिभागियों ने कही।

प्रतिभागियों ने आगे कहा कि इसके अलावा विस्थापन, हिंसा, बेरोजगारी और अशिक्षा भी युवा पीढ़ी के लिए चुनौतियां खड़ी करती हैं जिसके लिए उन्होंने स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं के "मूलभूत" परिवर्तन की जरूरत की ओर इशारा किया ताकि निर्णय लेने और नीति निर्धारण के उच्चतम स्तरों पर युवाओं को शामिल किया जा सके।

जीसीईडी का इस्तेमाल करते हुए, जो संयुक्त राष्ट्र महासचिव के ग्लोबल एजुकेशन फर्स्ट इनिशिएटिव (जीईएफआई) का समर्थन करने के लिए सभी संस्कृतियों, धर्मों और जातियों के लोगों के समावेश, आपसी सम्मान और सहिष्णुता पर आधारित एक ढांचा है, युवा नेताओं की एक नई पीढ़ी को विकास, मानवाधिकार, शांति और सुरक्षा के क्षेत्रों में आंतरिक-मार्ग बनाए जाने की उम्मीद है।

यह देखते हुए कि दुनिया भर के युवा अधिकतर हिंसा और टकराव से प्रभावित हो रहे हैं, उनका मानना है कि दूसरे फील्ड में युवाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है जो संयुक्त राष्ट्र के तीन स्तंभों में से एक है।

युवाओं पर महासचिव के विशेष दूत के कार्यालय के आंकड़ों से पता चलता है कि युवा दुनिया भर के अतिसंवेदनशील और युद्धग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले लगभग 1.5 अरब लोगों की आबादी का 40 प्रतिशत हिस्सा बनते हैं जबकि सशस्त्र संघर्ष में बच्चों पर संयुक्त राष्ट्र की सबसे ताजा रिपोर्ट कहती है कि बच्चे अधिक से अधिक संख्या में युद्ध संबंधी दुर्घटनाओं का शिकार बन रहे हैं।

सीरिया, अफगानिस्तान और इराक में चल रहे लंबे संघर्ष के साथ-साथ जारी राजनीतिक आर्थिक और पर्यावरण संकट भी सैकड़ों हजार युवाओं को अपने घरों से बाहर निकलने को मजबूर कर रहे हैं; वर्ष 2011 में 140 लाख युवाओं को युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से मजबूरन विस्थापित होना पड़ा था।

नशीली दवाओं और अपराध पर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (यूएनओडीसी) द्वारा प्रकाशित हत्या की दरों के एक वैश्विक अध्ययन में 15 से 19 वर्ष के बीच के पुरुषों को आग्नेयास्त्रों से मौत के लिए सर्वाधिक संवेदनशील पाया गया है जबकि सशस्त्र हिंसा की महामारी से ग्रस्त सोसाइटियों में रहने वाली युवतियां और लडकियां अपने साथियों द्वारा मारे जाने के "उच्च जोखिम" पर हैं।

दुनिया भर में हत्या के पीड़ितों का एक पूरा 43 प्रतिशत 15-29 वर्ष की उम्र के युवाओं का है जबकि अमेरिका के युवा पुरुष विश्व स्तर पर प्रत्येक साथ हत्या के पीड़ितों में से एक के लिए जिम्मेदार हैं।

इन वास्तविकताओं के बावजूद युवाओं का कहना है कि उन्हें शायद ही कभी टेबल पर किसी सीट की पेशकश की जाती है।

पिछले महीने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में सभा को संबोधित करते हुए युवाओं पर महासचिव बान की-मून के पहले दूत, अहमद अलहेंदावी इस तथ्य का खुलासा किया कि 'शांति और सुरक्षा' का क्षेत्र पारंपरिक रूप से एक विशिष्ट क्लब रहा है जो केवल विशेषज्ञों, राजनयिकों और राजनेताओं के लिए खुला होता है।

जॉर्डन में हाल ही में आयोजित 'युवा, शांति और सुरक्षा पर ग्लोबल फोरम' को याद करते हुए एल्हेंदावी ने अम्मान युवा घोषणापत्र में निर्धारित कार्रवाई के बिंदुओं पर ध्यान दिलाया - यह एक महत्वाकांक्षी दस्तावेज़ है जिसमें दुनिया भर के लगभग 11,000 युवाओं के विचारों को शामिल किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए इसकी सिफारिशों के बीच मुख्य बात "2017 तक संघर्ष और संघर्ष के बाद के हालातों में युवाओं की विशिष्ट जरूरतों, संपत्तियों, क्षमता और विविध पहचानों" का समाधान करने वाले एक वैश्विक नीतिगत ढांचे की स्थापना करना है।"

इसके अलावा यह घोषणापत्र लैंगिक समानता और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण सहित युवा लोगों के लिए विशेष चिंता के अन्य क्षेत्रों पर प्रकाश डालते हुए युवा शांति और सुरक्षा पर तत्काल एक प्रस्ताव पारित करने की मांग भी सुरक्षा परिषद से करता है।

दरअसल, युवा महिलाओं को अपने पुरुष समकक्षों की तुलना में लगभग दोगुने बोझ का सामना करना पड़ता है क्योंकि वे लिंग-आधारित हिंसा और प्रजनन स्वास्थ्य से संबंधित जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।

महिला शरणार्थी आयोग के अनुसार, 1986 के बाद किसी न किसी प्रकार के संघर्ष का सामना करने वाले सभी 51 देशों में किशोरियों के विरुद्ध यौन हिंसा के उच्च स्तरों की सूचना दी गई है।

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि गर्भावस्था और प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्याएं "विकासशील देशों में किशोरियों की दूसरी प्रमुख हत्यारी" हैं जो प्रतिवर्ष होने वाली दसियों हजार मौतों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

हर साल 18 वर्ष से कम उम्र की 200,000 लड़कियां विकासशील देशों में हर दिन बच्चे को जन्म देती हैं।

और अगर मौजूदा रुझान जारी रहता है तो 15-19 वर्ष के आयु वर्ग में एक चौंकाने वाली संख्या में 150 लाख लड़कियों को अभी और वर्ष 2030 के बीच मादा जननांग की विकृति सहन करनी होगी।

इसके अलावा युवा लोगों को अधिकतर कार्यबल से अलग करके रखा जाता रहा है, यह जानकारी 13 अक्टूबर को जारी किये गए एक सर्वेक्षण से मिली है।

'युवा रोजगार के लिए समाधान की ओर' रिपोर्ट से पता चला है कि युवा दुनिया भर के बेरोजगारों का 40 प्रतिशत हिस्सा बनते हैं, और अपने वयस्क समकक्षों की तुलना में उनके चार गुणा अधिक कार्य से बाहर रहने की संभावना रहती है।

लेकिन शिखर सम्मेलन में युवा नेताओं ने युवाओं को केवल अपने हालातों का शिकार होते देखने के विरुद्ध चेतावनी दी है। [आईडीएन- इनडेप्थन्यूज़ – 15 अक्टूबर 2015]