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विवेकशील सैनिक चुप्पी तोड़ रहे हैं

लेखक मेल फ्रिक्बर्ग

हेब्रोन, वेस्ट बैंक (आईडीएन) - दक्षिणी वेस्ट बैंक में हेब्रोन का प्राचीन बाइबिल संबंधी शहर यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्म का पवित्र स्थल है और यह ऐतिहासिक, पुरातात्विक एवं धार्मिक खजानों से भरपूर है।

हालांकि पहाड़ी, हवादार और संकरी सड़कें जो सुरम्य पहाड़ियों के बीच सुसज्जित हैं, एक कड़वे और खूनी इतिहास तथा तनाव की स्पष्ट अनुभूति को झूठा साबित करती हैं।

इब्राहिम का शहर अब 250,000 से अधिक फिलीस्तीनियों का बसेरा है। सैकड़ों इजरायली सैनिकों के पहरे में 1,000 से कम इजरायली चरम दुश्मनी के माहौल में फिलिस्तीनियों के बीच घुल-मिलकर रहते हैं।

बीते दशकों में दो समुदायों के बीच नफरत लगातार हिंसा में तब्दील हुई है जो रक्तपात में जाकर समाप्त हुआ है।

1994 में इजरायली निवासी डॉक्टर बरूक गोल्डस्टीन ने 20 से अधिक फिलीस्तीनियों को मशीनगन की गोलियों से भून दिया क्योंकि उन्होंने इब्राहिमी मस्जिद में इबादत की थी, इस घटना में फिलिस्तीनियों ने भी निवासियों को मार डाला और घायल कर दिया था।

इजरायल के कब्जे ने सैकड़ों फिलीस्तीनियों को उनके व्यवसायों और शहर के पुराने बाजार में स्थित घरों से बाहर कर दिया और सुहादा स्ट्रीट जो शहर के केंद्र में एक मुख्य सड़क है, वहां फिलिस्तीनियों का जाना वर्जित कर दिया।

विभिन्न मानवाधिकार संगठनों द्वारा इजरायली सुरक्षा बलों पर फिलीस्तीनियों के साथ दुर्व्यवहार करने और अनावश्यक रूप से उन्हें मार डालने का भी आरोप लगाया गया है।

यह इस पृष्ठभूमि के विरुद्ध है कि दो शांति संगठनों, एक फिलीस्तीनी एक इजरायली ने न्याय के लिए और कब्जे के जीवन के बारे में इजरायली और विदेशियों को शिक्षित करने के लिए साथ मिलकर काम किया है।

ब्रेकिंग द साइलेंस (बीटीएस) अनुभवी इजरायली सैनिकों का एक समूह है जिन्होंने दूसरे इंतिफादा की शुरुआत या अक्टूबर 2000 के विद्रोह के बाद से इजरायली सेना में काम किया है।
पूर्व इजरायली सैनिक इजरायलियों और पर्यटकों को हेब्रोन की यात्रा पर ले जाते हैं और उनको जमीनी परिस्थिति के बारे में बताते हैं।

बीटीएस के पब्लिक आउटरीच के निदेशक, अचिया शात्ज ने आईडीएन को बताया "हम एक ऐसी वास्तविकता के लिए चुकायी गयी कीमत के बारे में सार्वजनिक बहस को प्रेरित करने का प्रयास करते हैं जिसमें युवा सैनिकों को एक दैनिक आधार पर एक नागरिक आबादी का सामना करना पड़ता है और जो उस आबादी की रोजमर्रा की जिंदगी को नियंत्रित करने में लगे हुए हैं"।

"हम यात्रा समूहों को यह बताते हैं कि इजरायली कब्जे के पीड़ित नहीं हैं बल्कि फिलीस्तीनियों की स्थिति ऐसी है।"
कई इजरायली सैनिक अपनी सेवा अवधि के दौरान फिलिस्तीनियों के खिलाफ किए गए दुर्व्यवहारों की याद करते हैं।

शात्ज़ ने स्मरण किया "एक बार हमने एक फिलिस्तीनी के मकान को ध्वस्त कर दिया था जिसके बारे में हमने सोचा था कि वह आतंकवादी है और उसे तथा उसकी पत्नी पर हमला करके सड़कों पर खींच लाए थे।"

"बाद में हमें पता चला कि हमने गलत आदमी को पकड़ा था। हम जिस आदमी को खोज रहे थे वह सड़क पर दो मकान नीचे रह रहा था।"
शात्ज़ यूनिट के कमांडरों को भी याद करते हैं जो किसी 'आतंकवादी' को मार गिराने में नाकाम रहने पर निराश हो जाया करते थे।

बीटीएस के सैनिकों ने अधिक बुरे दुर्व्यवहारों का प्रमाण दिया है और शात्ज़ ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने जो कुछ देखा वह केवल हेब्रोन के लिए विशिष्ट नहीं था बल्कि पूरे वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी आबादी के साथ निबटने में कुछ इजरायली सैनिकों का नियमित व्यवहार ऐसा ही था।

कब्जे के बारे में इजरायलियों को शिक्षित करने के अलावा बीटीएस फिलिस्तीनियों, विशेष रूप से कार्यकर्ताओं के साथ पुल बनाने में भी विश्वास रखता है।

शात्ज़ ने बताया "फिलीस्तीनियों को इजरायलियों से परिचित कराना हमारे लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रूढ़िवादिता को तोड़ने में मदद करता है। अक्सर ऐसा पहली बार होता है जब इजरायली व्यक्तिगत से फिलीस्तीनियों से मुलाकात करते हैं"।

इस दिशा में बीटीएस यूथ अगेंस्ट द सेटलमेंट्स (वायएएस) नामक एक फिलिस्तीनी कार्यकर्ता समूह के साथ मिलकर काम करता है।

वायएएस एक राष्ट्रीय फिलिस्तीनी, गैर-पक्षपातपूर्ण कार्यकर्ता समूह है जो लोकप्रिय अहिंसक संघर्ष और सविनय अवज्ञा के माध्यम से फिलिस्तीन में इजरायली उपनिवेशन गतिविधियों (बस्तियां बनाने और विस्तार करने) को समाप्त करना चाहता है।

वायएएस के प्रवक्ता ईसा एमरो ने आईडीएन को बताया "हमारे कार्यकर्ताओं और इजरायली कार्यकर्ताओं के बीच काफी सहयोग होता है। हम पर्यटन, विरोध सहित सामुदायिक कार्रवाई, मानव अधिकारों के उल्लंघन के बारे में जागरूकता बढ़ाने जैसी बातों पर और यह इजरायलियों को यह दिखाने में कि हमारा जीवन कैसा है, साथ मिलकर जमीनी स्तर पर योजना बनाते हैं।

शात्ज़ ने आगे कहा "जब फिलीस्तीनी और इजरायली कार्यकर्ता एकजुट होते हैं और कब्जे के खिलाफ सहयोग करते हैं, हम इसे सह-प्रतिरोध कहते हैं"।

एमरो ने स्पष्ट किया "कई फिलीस्तीनी और इजरायली दोस्त बन गए हैं क्योंकि हमारी संयुक्त गतिविधियों से हमें एक अंतरंग आधार पर एक दूसरे को बेहतर ढ़ंग से समझने में मदद मिली है। फिलीस्तीनी भी उम्मीद दिखाते हैं जब उन्हें पता चलता है कि ऐसे इजरायली भी हैं जो हमारा ध्यान रखते हैं,"।

आईआर अमीम एक अन्य इजरायली शांति संगठन है जो फिलिस्तीनियों के साथ काम करता है।यह 2004 में स्थापित एक अलाभकारी संगठन है जो यरुशलम में इजरायली-फिलिस्तीनी संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करता है।

आईआर अमीम ने फिलीस्तीनी एनजीओ, पीस एंड डेमोक्रेसी फोरम के साथ यरुशलम पॉलिसी फोरम की स्थापना की है।

यह समूह उन गतिविधियों पर इजरायल की संसद और यरुशलम नगर पालिका को जानकारी प्रदान करता है जिनके बारे में उनका मानना है कि ये यरुशलम की स्थिरता को कमजोर करते हैं, समानता को बाधित करते हैं या इजरायलियों और फिलिस्तीनियों के बीच भविष्य की शांति वार्ताओं के लिए खतरा बनते हैं।

यह अपने सभी निवासियों की गरिमा और कल्याण सुनिश्चित करना और उनके पवित्र स्थलों और उनकी ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा करना चाहता है।

आईआर अमीम की सार्वजनिक पहुंच का मुख्य उद्देश्य यरुशलम के मुद्दे पर सार्वजनिक संवाद को फिर से आगे बढ़ाने के लक्ष्य के साथ इजरायली जनता तक पहुंचना है।

यह समूह जमीनी स्तर पर घटनाओं का विश्लेषण करने और इजराइल के लिए उनके परिणामों पर जनता को प्रोत्साहित करती है।यह कार्य अध्ययन यात्राओं, मीडिया गतिविधि, ब्रीफिंग, हाउस मीटिंग और शैक्षिक कार्यक्रमों के माध्यम से पूरा किया जाता है।

स्वीडिश पर्यटक एमी कार्लसन पूर्वी यरुशलम की आईआर अमीम की एक यात्रा पर साथ गए थे।कार्लसन ने आईडीएन को बताया "मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी कि पश्चिमी यरुशलम की तुलना में पूर्वी यरुशलम लाभों से कितना वंचित था"।

कार्लसन ने बताया "आईआर अमीम ने हमें बताया कि पूर्वी यरुशलम को यहूदी पश्चिमी यरुशलम की तुलना में नगर निगम की बजट का केवल एक छोटा सा हिस्सा ही मिलता है।यह स्पष्ट था कि शहर का पूर्वी क्षेत्र कितना वंचित था जहां हर तरफ कचरा फैला हुआ था, स्ट्रीट लाइट का अभाव था और कोई सड़क चिह्न उपलब्ध नहीं था। हालांकि पूर्वी यरुशलम के भीतर यहूदी बस्तियां सुव्यवस्थित थी और उनकी अच्छी देखभाल की जाती थी।

शांति के लिए इजरायलियों और फिलिस्तीनियों के साथ मिलकर काम करने के सकारात्मक अनुभवों के बावजूद शात्ज़ और अन्य इजरायली कार्यकर्ताओं ने मानव अधिकारों के लिए अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता के लिए एक व्यक्तिगत कीमत चुकाई है।

"मुझे मौत की धमकियां मिली हैं और पूर्व सहयोगियों द्वारा गद्दार कहा गया है। इजराइल से प्यार करना और उसके कब्जे से नफरत करना संभव है क्योंकि यह गलत है," शात्ज़ ने आगे बताया कि वे इसकी कीमत धमकियों और अपमान के रूप में चुकाने के लिए तैयार थे।" [आईडीएन-InDepthNews - 11 मार्च, 2015]