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वैश्विक नागरिकता के लिए शिक्षा का बढ़ता महत्व

जया रामचंद्रन द्वारा

न्यूयार्क (IDN) - जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने सितंबर 2012 में वैश्विक शिक्षा सर्वप्रथम नामक पहल की शुरुआत की थी, तब "वैश्विक नागरिकता को बढ़ावा देना" उनकी तीन प्राथमिकताओं में से एक था; अन्य दो प्राथमिकताएं थीं "हर बच्चे को स्कूल में भर्ती करना" और "शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार"।

बान ने कहा, "शिक्षा का अर्थ महज रोजगार के बाजार में प्रविष्टि होने से कहीं अधिक है। इसमें एक संवहनीय भविष्य और बेहतर दुनिया को आकार देने की शक्ति है। शिक्षा नीतियों को शांति, आपसी सम्मान और पर्यावरण की देखभाल को बढ़ावा देना चाहिए।"

अंतरराष्ट्रीय समुदाय जैसे-जैसे 2015-पश्चात के विकास एजेंडा, जिन्हें आमतौर पर सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के रूप में जाना जाता है, को अपनाने की ओर कदम बढ़ा रहा है, वैश्विक नागरिकता के लिए शिक्षा की महत्ता काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। 

क्योंकि पृथ्वी और उसके निवासियों को प्रभावित करने वाला कोई भी लक्ष्य, दुनिया भर के लोगों और सरकारों द्वारा संकीर्ण राष्ट्रीय हितों से ऊपर उठे बिना और ग्रह के हित में कार्य किए बिना हासिल नहीं किया जा सकता है।

ब्राजील में जून 2012 में संवहनीय विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में यह प्रस्ताव पारित किया गया कि SDGs को 2015 के बाद के संयुक्त राष्ट्र के सार्वभौमिक भलाई के विकास एजेंडे के साथ सुसंगत होना चाहिए और उसमें एकीकृत किया जाना चाहिए।

रियो निष्कर्ष दस्तावेज़ द्वारा स्थापित ओपन वर्किंग ग्रुप इस बीच 17 उद्देश्यों और 169 लक्ष्यों पर सहमत हो गया है, जिनका ध्येय है गरीबी उन्मूलन, खपत और उत्पादन के असंवहनीय पैटर्न को बदलना और संवहनीय पैटर्न को प्रोत्साहित करना, और आर्थिक एवं सामाजिक विकास के प्राकृतिक संसाधन आधार की रक्षा और प्रबंधन।

ये 4 दिसंबर 2014 को जारी की गयी बान की "सिंथेसिस रिपोर्ट", '2030 तक आत्मसम्मान का मार्ग" में वर्णित के अनुसार सतत विकास के व्यापक उद्देश्य और अनिवार्य आवश्यकताएं हैं।

बान छः आवश्यक तत्वों के एक एकीकृत सेट का प्रस्ताव करते हैं जो एक साथ मिलकर 25-27 सितंबर से सतत विकास पर विशेष संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के पहले सदस्य देशों को विचार-विमर्श की सुविधा प्रदान करने और उनको रियो सम्मेलन द्वारा अनिवार्य किए गए संक्षिप्त एवं आकांक्षापूर्ण एजेंडे पर पहुंचने में सक्षम बनाने के लक्ष्य को पूरा करेगा।

ये छह आवश्यक तत्व हैं: (1) गरीबी को मिटाना और असमानताओं से लड़ना; (2) स्वस्थ जीवन, ज्ञान और महिलाओं तथा बच्चों का समावेश सुनिश्चित करना; (3) एक मजबूत, समावेशी और परिवर्तनकारी अर्थव्यवस्था विकसित करना; (4) सभी समाजों और अपने बच्चों के लिए हमारे पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा करना; (5) सुरक्षित और शांतिपूर्ण समाजों तथा सशक्त संस्थानों को बढ़ावा देना; और (6) सतत विकास के लिए वैश्विक एकजुटता में तेजी लाना।

सतत विकास के लिए शिक्षा (ईएसडी) और निहितार्थ के अनुसार, वैश्विक नागरिकता के लिए शिक्षा (ईजीसी) 2015 के पश्चात सतत विकास के प्रस्तावित एजेंडे में एक महत्वपूर्ण घटक है।

प्रस्तावित लक्ष्य 4 (2015 के बाद शिक्षा का लक्ष्य) "समावेशी और उचित गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने तथा सभी के लिए आजीवन सीखने के अवसरों को बढ़ावा देने" की मांग करता है। जबकि प्रस्तावित लक्ष्य 12 का लक्ष्य "उपभोग और उत्पादन के संवहनीय पैटर्न सुनिश्चित करना" है; और लक्ष्य 13 "जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई करने" की जरूरत स्पष्ट करता है।

इन लक्ष्यों को हासिल करने में सहायता के लिए ईएसडी (और ईजीसी) में तीन प्रस्तावित लक्ष्यों को शामिल किया गया है:

- सबसे पहले, "सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए 2030 तक सभी शिक्षार्थियों को आवश्यक ज्ञान और कौशल की प्राप्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है जिसमें अन्य बातों के साथ-साथ शिक्षा के माध्यम से सतत विकास एवं सतत जीवन शैली, मानव अधिकार, लैंगिक समानता, शांति एवं अहिंसा, वैश्विक नागरिकता की संस्कृति को बढ़ावा देना और सतत विकास के लिए सांस्कृतिक विविधता और संस्कृति के योगदान की सराहना करना शामिल है।"

- ईएसडी संबंधी एक अन्य लक्ष्य 2030 तक "हर जगह लोगों को प्रकृति के साथ तालमेल बना कर सतत विकास और जीवनशैली के लिए प्रासंगिक जानकारी और जागरूकता सुनिश्चित करने" का प्रस्ताव करता है।

- और अंत में तीसरा लक्ष्य जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने में सहायता के लिए "शिक्षा, जागरूकता बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन के शमन, अनुकूलन, प्रभाव में कमी और पूर्व चेतावनी पर मानव स्तरीय तथा संस्थागत क्षमता में सुधार करने" का सुझाव देता है।

सतत विकास के लिए शिक्षा पर विश्व सम्मेलन की वेबसाइट पर पोस्ट किया गया यह विश्लेषण सोका गकई इंटरनेशनल (एसजीआई) के अध्यक्ष दाईसाकू इकेदा द्वारा वैश्विक नागरिकता के लिए एक शैक्षिक कार्यक्रम के आधार के रूप में बताए गए तीन प्रमुख तत्वों की पुष्टि करता है।

जून 1996 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी के टीचर्स कॉलेज के एक व्याख्यान में इकेदा ने पहले ही वैश्विक नागरिकता के आवश्यक तत्वों के रूप में निम्नलिखित का समर्थन किया था:
- समस्त जीवन और आजीविका के परस्पर संबंध को समझने का ज्ञान
- मतभेद से नहीं डरने या अस्वीकार करने बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के लोगों का सम्मान करने और उनको समझने का प्रयास करने और उनका सामना होने पर आगे बढ़ने का साहस
- एक कल्पनाशील सहानुभूति बनाए रखने की संवेदना जो व्यक्ति के आसपास के दायरे से आगे जाती है और दूरदराज के स्थानों में पीड़ित लोगों तक पहुंचती है।

अपने 'शांति प्रस्ताव 2014' में उन्होंने कहा है कि वैश्विक नागरिकता की शिक्षा में निम्न बातें शामिल होनी चाहिए:

- मानव जाति के सामने आने वाली चुनौतियों की गहरी समझ होना, लोगों को अपने अभिप्रायों का पता लगाने में सक्षम बनाना और साझा उम्मीद एवं आत्मविश्वास पैदा करना कि इस तरह की समस्याएं, मानव मूल के होने, मानवीय समाधानों के लिए उत्तरदायी हैं;

- स्थानीय घटना में आसन्न वैश्विक समस्याओं के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान करना, इस तरह के संकेतों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना और ठोस कार्रवाई करने के लिए लोगों को सशक्त करना; और

- यह सहानुभूतिपूर्ण कल्पना और गहरी जागरूकता पैदा करना कि अपने देश को लाभ पहुंचाने वाली कार्रवाइयों का अन्य देशों पर एक नकारात्मक प्रभाव हो सकता है या उनके द्वारा एक खतरा समझा जा सकता है जो इसे दूसरों की कीमत पर अपनी खुशहाली और समृद्धि की तलाश नहीं करने का एक साझा संकल्प बनाने का कारण हो सकता है।

जापान के आइची-नागोया में नवंबर 2014 में आइची-नागोया सम्मेलन में सतत विकास के लिए शिक्षा पर ग्लोबल एक्शन प्रोग्राम (जीएपी) का शुभारंभ किया गया जो जमीनी स्तर पर कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित करता है।

जीएपी (GAP) और विश्व सम्मेलन के अन्य परिणाम दक्षिण कोरिया के इंचियोन में 19 से 22 मई, 2015 तक आयोजित होने वाले वर्ल्ड एडुकेशन फोरम के विचार-विमर्श को जानकारी प्रदान करेंगे जिसका लक्ष्य 2015 के बाद शिक्षा के एक नए एजेंडे पर सहमति बनाना और आने वाले वर्षों के लिए कार्रवाई के एक वैश्विक ढांचे को अपनाना होगा। [आईडीएन-इनडेप्थन्यूज - 28 दिसंबर 2014]